किरण मिश्रा's articles

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छायावाद युग एवं प्रसाद वांग्मय कीसर्वोत्कृष्ट रचना कामायनी का श्रद्धा सर्ग जीवनदर्शन तथा विचार वैभव की दृष्टि से अपना विशेष महत्व रखता है। श्रद्धा कामायनी का ही दूसरा नाम हैजिसे आलोच्य महाकाव्य की नायिका,मनु की प्रेरणा,जीवन का श्रद्धा तत्व आदि रूपों में देखा गया है।महाप्रलय की गहन घटा में चिन्तालीन एवं निराश बैठे मनु के […]
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हिंदी साहित्य में राष्ट्रकवि दिनकर का पदार्पण सन 1935 ई में उनके सुप्रसिद्ध काव्यग्रन्थ रेणुका के प्रकाशन के साथ हुआ।छायावाद के श्रेष्ठ कवि जयशंकर प्रसाद कृत कामायनी जैसी रचना भी उस समय तक प्रकाश में आ चुकी थी। काव्यभाषा के रूप में हिंदी की स्थापना के साथ ही उसका मानक रूप भी सुनिश्चित हो चुका […]

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