स्वस्थ रहने के 10 लाभकारी योगासन

Yogasanas In Hindi

दोस्तों आप सभी जानते हैं कि योग का इतिहास कितना प्राचीन है। ऐसा माना जाता है कि जब से सभ्यता शुरू हुई तब से योग का आरम्भ और चलन है। योग के विज्ञान की उत्पत्ति हजारों साल पहले धर्मो और आस्थाओं के जन्म से पहले ही हो चुकी थी। योग में शिव को सबसे पहला योगी या गुरु या आदि गुरु के रूप में माना जाता है। भगवान् शिव के बाद वैदिक काल में भारत के ऋषि-मुनियों द्वारा ही योग का प्रारंभ माना जाता है। इसके बाद में श्री कृष्णा, महावीर और बुद्ध के विस्तार दिया।

इसके पश्चात् पूर्व वैदिक काल (2700 ईसा पूर्व) में ही योग का उदय हो गया था इस काल में योग नित्य प्रति प्रातः काल किया जाता था। पूर्व वैदिक काल के बाद पतंजलि काल में योग के मौजूद होने के साक्ष्य देखे गए हैं। महर्षि पतंजलि द्वारा योग पर सर्वप्रथम पुस्तक लिखा गया जिसमे योग के अवस्थाओं और उसके प्रकारों के बारे में विस्तृत उल्लेख किया गया है।

“योग शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के ‘युज’ शब्द से हुई है जिसका अर्थ होता है जोड़ या मेल। योग एक क्रिया है जीवात्मा का परमात्मा से मिलने का।”

इसलिए कहा गया है अगर जीवन को सुखमय बनाना है तो योग करना बहुत ही आवश्यक है। आज हम इस लेख में कुछ ऐसे ही योगासनों के बारे में बात करेंगे जिन्हे आप अपने जीवन में शामिल कर अपने “जीवन को स्वस्थ और सुन्दर” बना सकते हैं।

पहला आसान – धनुरासन / Dhanurasana In Hindi

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विधि –

  • सर्वप्रथम जमीन पर आसान बिछा कर पेट के बल लेट जाये।
  • फिर अपने दोनों हाथों को पीछे की ओर ले जाकर पैरों को पकड़कर खींचे, इस स्थिति में आपका शरीर कमान जैसी हो जाती है।
  • इसके बाद लम्बी सांस लेते हुए सर और छाती को ऊपर की ओर उठायें और जितना समय तक हो सके इसी स्तिथि में रहें।
  • यह क्रिया अपने सामर्थ्यानुसार करें।

धनुरासन के लाभ/ benefits of Dhanurasan In Hindi

  • इस आसान से शरीर का मोटापा दूर होता है।
  • पेट संबंधी परेशानी और दर्द दूर होता है।
  • रीढ़ की हड्डी में आयी अकड़न दूर होता है और शरीर लचीला बनता है।

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दूसरा आसान – ताड़ासन / Tadasana In Hindi

यह आसान खड़े होकर किया जाता है जिसमे शरीर की स्थिति ताड़ के वृक्ष जैसी हो जाती है इसलिए इसे ताड़ासन कहते हैं।

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विधि –

  • सबसे पहले इसमें जमीन पर आसान बिछा कर सीधे खड़े हो जाइये।
  • इसके पश्चात् एड़ियों को ऊपर सीधा उठायें।
  • एड़ियों को उठाते समय अपने दोनों हाथों की उँगलियों को एक-दूसरे में फंसाकर ऊपर उठायें और सर ऊपर की ओर हाथों की उँगलियों की ओर रहे।
  • इसके बाद सांस अंदर खींचे।
  • एड़ियों और हाथों को ऊपर उठाने के पश्चात् शरीर का भार पैरों के पंजो पर डालें और शरीर को ऊपर की ओर खींचे।
  • इसके बाद कुछ समय इस स्तिथि में रहने के बाद साँस छोड़ते हुए शरीर को नीचे लाएं और एड़ियों को सामान्य अवस्था में लाये।
  • यह क्रिया 10-15 बार दोहराएं।

ताड़ासन के लाभ / Benefits Of Tadasana In Hindi

  • इससे शरीर का मोटापा कम होता है।
  • कब्ज को परेशानी दूर होती है।

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तीसरा आसन – पद्मासन / Padmasana In Hindi

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विधि –

  • सबसे पहले जमीन पर आसन बिछा लें।
  • इसके पश्चात् आसन पर बैठ कर बाएं पैर की एड़ी को दाएं पैर के ऊपर इस प्रकार रखें कि नाभि के पास एड़ी रहे।
  • इसके बाद फिर दाएं पैर को बाएं पैर के ऊपर ऐसे रखे कि एड़ी नाभि के निकट रहे और पास-पास रहे।
  • बैठे हुए रीढ़ को एकदम सीधा रखें।
  • उसके पश्चात् दोनों हाथों को घुटनो पर चित्र में दिखाए अनुसार रखें।
  • और अंत में आंख बंद करके शांत मन से उसी अवस्था में रहें।
  • इस आसन को आप 5-10 मिनट रोज सुबह कर सकते हैं।

पद्मासन के लाभ /Benefits Of Padmasana in Hindi

  • फेफड़ों के क्रियाशीलता बढ़ती है।
  • मन शांत और तनाव दूर होता है।
  • जांघ और पेट की मांसपेशियां मजबूत होती है।

चौथा आसन – वज्रासन / Vajrasana In Hindi

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विधि –

  • वज्रासन के लिए किसी भी समतल स्थान की आवश्यकता होती है जहाँ आप उस आसन को कर सके।
  • किसी भी समतल स्थान पर घुटनो के बल बैठ जाएँ।
  • सर और कमर को एकदम सीधा रखें।
  • अपने दोनों हथेलियों को घुटनो पर हथेलियां को नीचे कि तरफ करके रखें।
  • इसके पश्चात् एड़ियों को अपने घातक मांसपेशियों के पूरी तरह तरह नीचे रखें।
  • इस अवस्था में 5-10 मिनट बैठे रहें।

वज्रासन के लाभ / Benefits Of Vajrasana In Hindi

  • यह आसान भोजन पश्चात् किया जाता है, इससे पाचन-शक्ति में वृद्धि होती है और भोजन का पाचन अच्छी तरह से होता है।
  • मन शांत होता और एकग्रता बढ़ती है।
  • मासिक धर्म को नियमित करने में सहायक होती है।
  • बवासीर के रोगियों के लिए लाभकारी है।

पांचवा आसन – हलासन / Halasana In Hindi

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विधि –

  • सबसे पहले जमीन पर आसन बिछा लें।
  • इसके पश्चात् आसन पर पीठ के बल दोनों पैरों सटाकर कर लेट जाएँ।
  • फिर दोनों हथेलियों को नीचे की तरफ रखे।
  • इसके बाद पैरों को सांस अंदर लेते हुए धीरे-धीरे उठाये और चित्र में दिए अनुसार अवस्था में आ जाएँ।
  • इसी स्तिथि में क्षमता अनुसार रहे फिर धीरे-धीरे सामान्य अवस्था में आ जाएँ।

हलासन के लाभ / Benefits of Halasana In Hindi

  • इस आसन को करने से मोटापा काम होता है।
  • दिमाग शांत रहता है और तनाव कम होता है।
  • रक्त संचार सही होता है।
  • कंधे और रीढ़ की हड्डी में खिंचाव होने से शरीर लचीला होता है।

छठवां आसन – शलभासन / Shalbhasana In Hindi

इस आसन में आप शलभ यानि के टिड्डे जैसे मुद्रा में रहते हैं इसलिए इसे शलभासन कहा जाता है।

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विधि –

  • जमीन पर आसन बिछा लें।
  • फिर आसन में पेट के बल लेट जाएँ और दोनों हाथ के हथेलियों को ऊपर की तरफ करके जमीन पर रखे रहें।
  • इसके पश्चात् दोनों पैरों को आपस में जोड़ लें और सर को थोड़ा ऊपर उठा कर रखते हुए सीधा देखें।
  • इसके बाद पैरों को एक साथ धीरे-धीरे ऊपर की ओर उठायें और इतना ऊँचा उठाने की कोशिश करें जितना आप उठा सकते हैं।
  • इस स्तिथि में कुछ समय रहने के पश्चात् पुनः सामान्य अवस्था में आ जाएँ।

शलभासन के लाभ / Benefits Of Shalbhasana In Hindi

  • रीढ़ की हड्डी में लचीलापन आता है।
  • पेट संबंधी परेशानी दूर होती है।
  • पीठ व इसके निचले हिस्से में रक्त संचार नियमित होता है।
  • इससे श्रोणि अंगो में मजबूती आती है।

सातवां आसन – भुजंगासन / Bhujangasana In Hindi

इस आसन को करने समय शरीर की स्थिति भुजंग (सर्प) जैसी हो जाती है इसलिए इसे भुजंगासन कहते हैं।

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विधि –

  • सबसे पहले जमीन पर साफ़ आसन बिछा लें।
  • फिर आसन पर पेट के बल होकर लेट जाएँ और दोनों पैरों को आपस में मिलते हुए जमीन से पूरी तरह सटा कर रखें।
  • इसके पश्चात् दोनों हाथों की हथेलियों को कन्धों के पास नीचे हथेली करके रखे।
  • इसके बाद सांस अंदर लेते हुए सर और छाती को उठाते हुए नाभि तक उठायें।
  • इस अवस्था में कुछ समय रहने के बाद सांस छोड़ते हुए पुनः सामान्य अवस्था में आएं।

भुजंगासना के लाभ / Benefits Of Bhujangasana In Hindi

  • इस आसन से रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है।
  • पेट के मांसपेशियों में खिंचाव होने के कारण मोटापा कम होता है।
  • इससे नितम्बों मजबूती मिलती है।
  • साइटिका से राहत मिलती है।

आठवां आसन – चक्रासन / Chankrasana In Hindi

चक्रासन को करते समय शरीर की स्थिति अर्ध चक्र जैसी हो जाती है इसलिए इस चक्रासन कहते हैं। इसे उर्ध्वा धनुरासन भी कहा जाता है क्यूंकि इसमें शरीर ऊपर की ओर धनुष के सामान हो जाता है।

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विधि –

  • सबसे पहले जमीन में आसन बिछा लें।
  • इसके बाद पीठ के बल होकर आसन पर लेट जाएँ।
  • फिर दोनों पैरों को मोड़ कर जितना हो सके अपने कूल्हों के पास ले आएं।
  • अपने हाथों को सर के पास उल्टा करते हुए इस प्रकार रखे कि हथेली जमीन की तरफ रहे।
  • फिर धीरे-धीरे हाथों और पैरों पर वजन कर कमर और कन्धों को ऊपर उठायें।
  • जब इस आसन में कमर और कन्धों को ऊपर उठायें तो पैरों को मजबूती से टिकाये रखें।
  • फिर इस स्थिति में 5-10 सेकण्ड्स रहने के बाद पुनः सामान्य अवस्था में आ जाएँ।
  • यह क्रिया जितना संभव हो सके उतनी बार करें।

चक्रासन के लाभ / Benefits Of Chakrasana In Hindi

  • इस आसन से नितम्ब, जांघ और कलाइयां मजबूत होती हैं।
  • इस आसन से रीढ़ ही हड्डी लचकदार बनती है।
  • दमा, पीठदर्द जैसे समस्याओं में लाभ मिलता है।
  • इससे थायराइड और पिट्यूटरी ग्रंथि एक्टिव होती है।
  • छाती और फेफड़ों में खिचाव होने से शरीर लचीला होता है।

नौवां आसन – शीर्षासन / Shirshasana In Hindi

इस आसन को करते समय सर पर बल दिया जाता है इसलिए इस आसन को शीर्षासन कहा जाता है।

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विधि –

  • सबसे पहले जमीन पर आसन बिछा लें।
  • इसके बाद आसन पर घुटनों के बल वज्रासन में बैठ जाएँ और ऊपर होकर दोनों हथेलियों को जमीन पर उँगलियों को फंसकर कर रखे और उस पर सर को टिकाएं।
  • इस तरह सांस सामान्य रखें और फिर आपका शरीर त्रिकोण मुद्रा में आ जाता है।
  • इसके बाद दोनों पैरों को एक साथ ऊपर उठाये जब तक आपका पूरा शरीर एक सीध में ना आ जाये।
  • इस तरह आपका पूरा वजन सर और आपके कन्धों पर रहता है और इस आसन को 5 मिनट से ज्यादा न करें।

शीर्षासन के लाभ / Benefits Of Shirshasana In Hindi

  • इस आसन से दिमाग शांत रहता है तनाव कम होता है।
  • यह आसन पैर और रीढ़ की हड्डियों के लिए बहुत फायदेमंद है।
  • इस आसन से फेफड़ों की क्रियाशीलता अच्छी होती है।
  • इससे पाचन क्रिया सही होती है।

दसवां आसान – सर्वांगासन / Sarwangasana In Hindi

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विधि –

  • सबसे पहले जमीन में आसान बिछा लें।
  • फिर आसान में पीठ के बल लेट जाये और हथेलियों को शरीर के बराबर नीचे की तरफ रखे।
  • इसके पश्चात् धीरे-धीरे दोनों पैरों को उठायें और फिर पीठ में दोनों हथेलियों को टिका कर रखें, ध्यान रहे दोनों कोहनियां जमीन से ही लगी रहे और सर पूरा जमीन से ही सटे रहे।
  • इसके बाद पैरों को और रीढ़ की हड्डी को एक सीध में आते तक उठाते रहें।
  • जब दोनों पैर और रीढ़ सीध में आ जाये तो कुछ देर करीब 1-4 मिनट या जितने समय तक आप रह सके इसी अवस्था में रहिये।
  • उसके बाद पुनः धीरे-धीरे पैरों को नीचे लाएं और सामान्य अवस्था में आ जाये।

सर्वांगासन के लाभ / Benefits Of Sarwangasana In Hindi

  • इस आसान को करने से कब्ज की समस्या दूर होती है।
  • इससे पाचन शक्ति में विद्धि होती है।
  • पेट की मांसपेशियां मजबूत होती है।
  • थाइराइड नियंत्रण में रहता है।
  • रीढ़ की हड्डी में खिचाव के कारण लचीला और मजबूत होता है।

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